वो दिन थे मेरे शबाब के ,
तेरी चाहतों में गुज़र गए ,
तेरी जुस्तजू में रवां दवां,
कभी संग थे कभी कहकशां ,
....वो दिन भी कितने हसीं थे ,
जो मुसाफातों में गुज़र गए,
कभी राजदां ने सितम किया,
कभी में रकीब से जा मिला,
वो जो लम्हे थे मेरे प्यार के,
वो राक़बतों में गुज़र गए,
कभी दिल गया कभी जान गयी,
कभी रूह बदन से निकल गयी,
वो जो लम्हे थे मेरे प्यार के,
वो शकावतों में गुज़र गए,

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